मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के चयन पर पार्टी के भीतर विरोध के सुर। भाजपा नेता आशीष अग्रवाल ने राहुल-प्रियंका के फैसलों पर उठाए सवाल, क्रॉस वोटिंग के दिए संकेत। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा पूरी तरह गरमा चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। जहाँ एक तरफ भाजपा अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस ने अपनी सुरक्षित सीट पर वरिष्ठ नेत्री मीनाक्षी नटराजन को चुनावी मैदान में उतारा है। हालांकि, इस घोषणा के साथ ही कांग्रेस के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें भी तेज हो गई हैं, जिसे लेकर अब 'क्रॉस वोटिंग' की अटकलें लगाई जाने लगी हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा के वर्तमान संख्या बल और समीकरणों को देखा जाए तो राज्य की तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस की जीत पहले से ही तय मानी जा रही है। इस निश्चितता के बावजूद, कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार के नाम की घोषणा के बाद से राज्य के राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कांग्रेस आलाकमान द्वारा मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर ही सुर बदलने लगे हैं। राजनैतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के कई विधायक और जमीनी नेता इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उम्मीदवार के चयन को लेकर पार्टी के भीतर सुलग रही यह नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस असंतोष को वक्त रहते नहीं संभाला गया, तो चुनाव के दौरान पार्टी को 'क्रॉस वोटिंग' जैसी असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस के इस अंदरूनी घमासान पर चुटकी लेते हुए भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से पहले ही कांग्रेस का आंतरिक विरोध और बिखराव जगजाहिर हो चुका है। आशीष अग्रवाल ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता खुद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के फैसलों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
भाजपा मीडिया प्रभारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की संभावना अब केवल एक कयास नहीं रह गई है, बल्कि इसके स्पष्ट संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी राजनीतिक दल के अपने ही विधायक शीर्ष नेतृत्व के निर्णयों को चुनौती देने लगें, तो यह साफ दर्शाता है कि नेतृत्व पर से उनका भरोसा उठ चुका है। भाजपा अब कांग्रेस के इस आंतरिक असंतोष और कलह को चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
मध्य प्रदेश की इस राजनैतिक उठापटक के बीच अब सभी की निगाहें मतदान के दिन और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिक गई हैं। देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपने नाराज विधायकों को मनाने में सफल रहती है या फिर भाजपा इस स्थिति का फायदा उठाकर कोई नया राजनैतिक उलटफेर करने में कामयाब होती है।

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