सीधी में तेंदुए की खाल बरामद होने के बाद एसटीएफ और वन विभाग की जांच मऊगंज तक पहुंची। पिपराही से तीन संदिग्ध हिरासत में लिए गए। तस्करी नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सीधी, स्टार समाचार वेब
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ स्टेट टाइगर रिजर्व टास्क फोर्स (एसटीएफ) और वन विभाग की कार्रवाई में तेंदुए की खाल बरामद होने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। 5 सितंबर को सीधी शहर में थार वाहन से तेंदुए की खाल के साथ पकड़े गए दो आरोपियों से पूछताछ के बाद मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र के ग्राम धनुहीनार में दबिश दी गई, जहां से शिकार में प्रयुक्त सामग्री के साथ एक अन्य आरोपी पकड़ा गया। इसके बाद वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ते हुए एसटीएफ ने सीधी-मऊगंज सीमा के ग्राम पिपराही में भी कार्रवाई की। यहां शनिवार सुबह से रविवार तक चली गोपनीय कार्रवाई में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। रविवार शाम करीब 4 बजे तीनों को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल सीधी लाया गया।
थार से मिली थी तेंदुए की खाल
5 सितंबर को राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) भोपाल इकाई ने गोपनीय सूचना के आधार पर सीधी शहर में कार्रवाई की थी। भोपाल की टीम और वन विभाग के अधिकारी निगरानी में थे। इसी दौरान बहरी की ओर से आए थार वाहन को रोककर दो युवकों को हिरासत में लिया गया।
तलाशी के दौरान दो बोरियों में रखी तेंदुए की खाल बरामद हुई। खाल के सत्यापन के बाद उसके वयस्क तेंदुए की होने की पुष्टि की गई। कार्रवाई में थार वाहन भी जब्त किया गया। वन्यजीव से संबंधित मामला होने के कारण दोनों आरोपियों को आगे की कार्रवाई के लिए सामान्य वन मंडल सीधी के वन विभाग को सौंपा गया। पूछताछ में आरोपियों ने तेंदुए का शिकार मऊगंज जिले की हनुमना तहसील के ग्राम धनुहीनार, पोस्ट बीरादेही के जंगल क्षेत्र में किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने हनुमना परिक्षेत्र की टीम के साथ संबंधित स्थान पर दबिश दी। यहां से एक अन्य आरोपी को पकड़ा गया और उसके कब्जे से खूंटी, तार, चाकू सहित शिकार में प्रयुक्त सामग्री बरामद की गई।
करीब तीन माह पहले शिकार की बात
पूछताछ में सामने आया कि तेंदुए का शिकार करीब तीन माह पहले घने जंगल में किया गया था। सूत्रों के अनुसार तेंदुए को करंट लगाकर मारने के बाद उसकी खाल को शरीर से बारीकी से उतारकर रखा गया था। खाल को ऊंची कीमत पर बेचने के लिए तस्करी से जुड़े लोगों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि खाल को कहां और किन लोगों के माध्यम से बेचा जाना था। बताया जा रहा है कि इसी नेटवर्क तक पहुंचने के लिए एसटीएफ ने व्यापारी बनकर आरोपियों से संपर्क साधा था। गोपनीय सूचना के आधार पर तैयार की गई कार्ययोजना के तहत टीम ने आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी। मोबाइल चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि तस्करी से जुड़े लोगों की पहचान हो सके।
तीन नामों पर जांच का फोकस
पिपराही से पकड़े गए आरोपियों में अनमोल सिंह चंदेल, पिता रणबहादुर सिंह चंदेल, निवासी ग्राम बीरादेही, उम्र करीब 25 वर्ष; अभिषेक उर्फ प्रिंस सिंह चंदेल, पिता पुष्पराज सिंह चंदेल, निवासी ग्राम दुधमनिया, उम्र करीब 27 वर्ष तथा लल्ला बैगा, निवासी ग्राम जड़कुड़ के नाम सामने आए हैं। इनकी भूमिका को लेकर एसटीएफ और वन विभाग पूछताछ कर रहे हैं। अभिषेक उर्फ प्रिंस सिंह चंदेल का नाम सामने आने के बाद मामले की राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि वो भाजपा के वरिष्ठ नेता शिव बहादुर सिंह चंदेल के पौत्र हैं। शिव बहादुर सिंह चंदेल पूर्व में भाजपा की ओर से सिहावल विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रह चुके हैं। हालांकि वन्यजीव तस्करी में अभिषेक की भूमिका और राजनीतिक परिवार से उनके संबंध को लेकर अभी आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
आगरा-तमिलनाडु तक कनेक्शन की जांच
एसटीएफ की जांच अब सीधी और मऊगंज से आगे बढ़कर दूसरे राज्यों तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार तस्करी नेटवर्क की कड़ियां आगरा और तमिलनाडु तक जुड़ने की संभावना को लेकर जांच की जा रही है। अंतरराज्यीय अथवा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका को भी जांच के दायरे में रखा गया है। जांच के दौरान सांभर, चीतल सहित अन्य वन्यजीवों के अवशेष और मगरमच्छ की खाल मिलने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इनकी बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। एसटीएफ मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पूरी कार्रवाई को शनिवार और रविवार को बेहद गोपनीय रखा गया। अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। अब बरामद खाल, शिकार में प्रयुक्त सामग्री और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। वन विभाग ने तेंदुए की खाल वाले मामले में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। 6 सितंबर को आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के बाद न्यायालय सीधी में प्रस्तुत किया गया। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई और विवेचना जारी है।


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