सतना-मैहर के सौ से अधिक निजी स्कूलों ने चेतावनी और समय-सीमा बढ़ने के बाद भी फीस संबंधी जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं की। अब नियमों के तहत इन संस्थानों पर पांच गुना तक अर्थदंड लगाया जा सकता है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी किस तरह चल रही है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पांच गुना जुर्माने की चेतावनी और समय-सीमा बढ़ाने के बावजूद भी सतना-मैहर जिले के एक सैकड़ा से अधिक निजी स्कूलों ने फीस की जानकारी अब तक फीस पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। दोनों जिलों में तकरीबन एक हजार से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं, बताया गया कि 79 प्राइवेट स्कूल जिनकी फीस 25 हजार से अधिक है उन्होंने पोर्टल पर जानकारी अपलोड कर दी थी। जिन स्कूलों की फीस 25 हजार से कम है उन्हें डीपीआई पोर्टल पर शपथ पत्र संबधी जानकारी अपलोड करनी थी, इसके लिए 30 मई तक की मोहलत दी गई थी लेकिन इसके बाद भी कई स्कूलों ने जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। जानकारी नहीं देने वाले स्कूलों में सबसे ज्यादा प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल हैं।
25 अप्रैल को जारी हुए थे पांच गुना जुर्माने संंबंधी निर्देश
लोक शिक्षण संचालनालय ने मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 की फीस संबंधी जानकारी 30 अप्रैल 2026 तक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया था। इसके लिए 2 अप्रैल को सभी निजी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि निर्धारित समय-सीमा तक बड़ी संख्या में स्कूलों ने जानकारी जमा नहीं की। इसके बाद विभाग ने अंतिम तिथि बढ़ाकर 20 मई कर दी, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार यदि कोई निजी स्कूल निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रस्तावित फीस संरचना की जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं करता है तो उससे प्रक्रिया शुल्क की पांच गुना राशि विलंब शुल्क के रूप में वसूली जाएगी।
इस तरह लगना था जुर्माना
जिन विद्यालयों का नामांकन 2 हजार से अधिक है उन संस्थाओं में जमा किए जाने वाली प्रक्रिय ा श्ुल्क पांच हजार है उन पर निर्धारित समयावधि पर जानकारी अपलोड करने पर अर्थदंड पांच गुना लगाकर 25 हजार रुपए निर्धारित किया गया है। वहंीं जिन विद्यालयों का नामांकन एक हजार से 2 हजार तक है उनमें 15 हजार, जिनका नामांकन 500 से 1000 तक है उन पर 10 हजार एवं जिनका नामांकन 500 तक है उन पर 5 हजार का अर्थदंड लगाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई।


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