सिद्धार्थ नगर में डेंगू संक्रमित युवक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आसपास के घरों में सर्वे शुरू किया। गर्भवती पत्नी भी संक्रमित मिलीं। रामनगर में एक अन्य युवक की एलाइजा जांच पॉजिटिव आई।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर में डेंगू का संक्रमण अब लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। सिद्धार्थ नगर के एक परिवार में बीमारी ने ऐसा कहर बरपाया कि 30 वर्षीय राजेश बुनकर की जान चली गई और उनकी सात माह की गर्भवती पत्नी भी डेंगू से जूझती मिलीं। मौत के बाद जिले में डेंगू के नाम का हड़कंप मचा है। सोमवार को मौके पर पहुंची मलेरिया विभाग की टीम ने आसपास के मकानों को राडार में रखा है। सभी के ब्लड सैंपल कराने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जाता है कि पुणे से लौटने के बाद बीमार हुए दंपती का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा था।
राजेश की हालत लगातार बिगड़ती गई। प्लेटलेट्स घटकर 27 हजार तक पहुंच गईं। चिकित्सकों ने उन्हें रीवा ले जाने की सलाह दी, लेकिन बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर निकले परिजनों को रास्ते में ही जिंदगी की सबसे दुखद खबर मिल गई। गौरतलब है कि सतना में यह डेंगू से दूसरी मौत है। इसके पहले जीवन ज्योति कालोनी की 60 वर्षीय रामदुलारी की मौत 18 अगस्त को हुई थी, बावजूद स्वास्थ्य विभाग का अभियान कागजों तक ही सीमित है।
घर के पांच सदस्यों का लिया सेम्पल
प्रियंका सात माह की गर्भवती हैं। डेंगू संक्रमण के चलते उन्हें भी हंसराज अस्पताल अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। एक नवंबर को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। पति की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला की स्वास्थ्य निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है। मौत की जानकारी मिलने के बाद मलेरिया विभाग ने सिद्धार्थ नगर स्थित घर और आसपास के क्षेत्र में सर्वे शुरू किया। दवा का छिड़काव कराने के साथ परिवार की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी जुटाई गई। विभाग द्वारा घर के पांच सदस्यों का सैंपल जांच के लिए लिया गया। घटना ने शहर में डेंगू नियंत्रण और समय पर प्रभावी उपचार की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
फेफड़ों में सूजन मृत्यु का कारण
मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सम्बद्ध जिला अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि डेंगू में आम तौर पर मरीजों की मौत फेफड़ों में सूजन के चलते होती है जिसे पाल्मोनरी एडीमा कहते हैं। डेंगू के मरीज में आमतौर पर बुखार, आॅक्सीजन की कमी, एसपीओटू लेवल कम होना और प्लेटलेट्स में गिरावट देखी जाती है, अगर मरीज का बुखार पांच से सात दिन में भी ठीक नहीं हो रहा और मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो हालत गंभीर होती जाती है और मरीज सर्वाइब नहीं कर पाता। वहीं प्लेटलेट्स कम होने से मरीज को कफ, यूरिन आदि के रास्ते ब्लीडिंग की भी शिकायत होती है। बरसाती सीजन के बाद कूलर आदि में स्टोर हुए पानी में डेंगू के लार्वा मिलते हैं।
29 को भर्ती, 1 को मौत
राजेश बुनकर पिता संतोष बुनकर अपनी पत्नी प्रियंका 26 वर्षीय और छोटे भाई अजय 20 वर्षीय के साथ पुणे में मजदूरी करते थे। परिजनों के मुताबिक, बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद तीनों 29 अक्टूबर की देर रात सतना लौटे। तबियत ज्यादा गंभीर होने पर डॉ. केएल नामदेव से चिकित्सकीय परामर्श के बाद बिहारी चौक स्थित विद्या पैथोलॉजी लैबोरटी में राजेश और प्रियंका की जांच कराई गई। रिपोर्ट में दोनों के डेंगू संक्रमित होने की पुष्टि हुई। राजेश की तबीयत में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने 31 अक्टूबर को उन्हें जिला अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर पुष्पांजलि अस्पताल में भर्ती कराया। यहां भी उनकी स्थिति चिंताजनक बनी रही। परिजनों के अनुसार, प्लेटलेट्स गिरकर 27 हजार रह गई थीं। प्लेटलेट्स चढ़ाने के बावजूद हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। सुधार न होने पर उसी दिन निजी अस्पताल पुष्पांजलि में भर्ती कराया गया। पुष्पांजलि के चिकित्सकों द्वारा मरीज को उचित उपचार के लिए रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। जैसे ही परिजन एक नवम्बर को मरीज को लेकर रीवा के लिए रवाना हुए रास्ते में ही मरीज ने दम तोड़ दिया।
... और इधर रामनगर में मिला मरीज
सतना जिले में डेंगू पांव पसार रहा है, पीक सीजन (मई से अगस्त)निकलने के बाद ही डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। सोमवार को डेंगू से पीड़ित सिद्धार्थ नगर निवासी की मौत की खबर मिलने के बाद शाम को रामनगर के गोविंदपुर निवासी 22 वर्षीय शिवम पटेल पिता रोहणी पटेल में डेंगू की पुष्टि हुई है। बताया गया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में 31 अक्टूबर को मरीज इलाज कराने आया था, लक्षण पर मरीज की जांच कराई गई जहां एलाइजा पॉजिटव मिला। शिवम पटेल गुजरात में सूरत शहर में नौकरी के सिलसिले में गए हुए थे। एक सप्ताह पूर्व सतना आए जहां डॉ. एसपी तिवारी को दिखाया जहां चिकित्सक द्वारा जांच कराई गई। बताया गया कि शिवम की तबीयत स्वस्थ है गांव में निवास कर रहे हैं और कोई दिक्कत नहीं है।
डेंगू वायरस में ब्लीडिंग से होती है मौत
मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सम्बद्ध जिला अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. मनोज प्रजापति ने बताया कि डेंगू एक प्रकार का वायरस है, अगर यह बिगड़ गया तो मरीज की जान बचा पाना मुश्किल हो जाता है। वायरस अपने ही प्रकार के अन्य नए वायरसों को गुणित अवस्था में पैदा करता है। इसकी बढ़त से शरीर के किसी भी हिस्से में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है जो कि मौत का कारण बनती है। डेंगू के दो घातक रूप हैं पहला हेम्ब्रेजिक फीवर और दूसरा शॉक सिंड्रोम, दोनों ही स्थितियां घातक हैं। डेंगू के इलाज की कोई स्पेशल दवा नहीं है केवल दर्द निवारक गोलियां और फ्लूइड चढ़ाया जाता है। प्लेटलेट्स अचानक से गिरने लगती है, हालांकि 95 प्रतिशत मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं जबकि पांच प्रतिशत मरीजों के लिए यह घातक बन जाता है।

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