सतना जिला अस्पताल की जर्जर इमारत में रैंप की छत का प्लास्टर गिरने से सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे। रोजाना 1500 मरीजों की आवाजाही के बावजूद मरम्मत और पुनर्निर्माण को लेकर प्रशासनिक उदासीनता बनी हुई है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल का करीब सात दशक पुराना भवन अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। अस्पताल परिसर में कई स्थान ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जहां दीवारें और छतें कमजोर हो चुकी हैं और कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं। सोमवार की रात अस्पताल के रैंप की छत के बड़े हिस्से का प्लास्टर अचानक गिर गया। ग्राउंड तल से प्रथम तल के वार्डों को जाने के लिए यह रास्ता प्रयोग किया जाता है। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे कारण बड़ा हादसा टल गया। मंगलवार की सुबह जब अस्पताल स्टाफ ने स्थिति देखी तो इसकी जानकारी प्रबंधन को दी गई।
पीडब्ल्यूडी कर रहा खानापूर्ति
बताया गया कि कई मर्तबा बैठक में भी शीर्ष अधिकारीयों को इस बात से अवगत कराया गया लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों द्वारा केवल खानापूर्ति के रूप में एस्टीमेट तैयार किया जाता है। गौरतलब है कि इस जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन करीब 1500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा को लेकर लापरवाही गंभीर खतरे को जन्म दे सकती है। अस्पताल कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि भवन की तत्काल जांच कराकर जर्जर हिस्सों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पानी रिसने के कारण गिरा प्लास्टर
बताया जा रहा है कि अस्पताल भवन का निर्माण लगभग 70 वर्ष पहले हुआ था और समय-समय पर मरम्मत कार्य किए जाने के बावजूद अब इसकी संरचना कमजोर हो चुकी है। मरीजों और उनके परिजनों में इस घटना के बाद भय का माहौल है। अस्पताल के सहायक प्रबंधक डॉ. धीरेन्द्र वर्मा ने बताया कि मामले की जानकारी सुपरवाइजर द्वारा दी गई जिसे सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह से भी साझा कर निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान पता चला कि छत का एक बड़ा कंक्रीट प्लास्टर गिरा है, केवल छड़ बस दिखाई दे रही हैं। आगामी सीजन में अभी खतरा टला नहीं है। अस्पताल भवन काफी पुराना है, बरसाती सीजन में कई जगह से पानी रिसने की शिकायतें हैं जिसके कारण यह हादसा हुआ है। उन्होंने बताया कि अस्पताल परिसर में बिगत वर्ष भी छज्जा गिरा था जिसके बाद अस्पताल के कई पॉइंट चिन्हित किये गए थे जर्जर अवस्था में है और बरसात में कभी भी गिर सकते हैं।
छतों में दरारें-उग आए पेड़
भवन की कई छतों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ रहा है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि छतों की दरारों में अब पेड़-पौधे तक उग आए हैं, जो भवन की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, छतों में उग रहे पेड़-पौधे जड़ों के जरिए संरचना को और कमजोर कर रहे हैं, जिससे भवन की उम्र तेजी से घट रही है। ऐसे में जल्द से जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है, ताकि संभावित हादसों को टाला जा सके।


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