सतना जिला अस्पताल में अव्यवस्थित पार्किंग से एम्बुलेंस घंटों जाम में फंसी रहीं। मरीजों और परिजनों ने ठेकेदार पर अवैध वसूली के आरोप लगाए, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने कार्रवाई का भरोसा दिया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
इलाज की आस लेकर जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों और परिजनों को उस वक्त भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जब अस्पताल परिसर में पांच से ज्यादा एम्बुलेंस घंटों तक जाम में फंसी रहीं। एम्बुलेंस में कैद मरीज तड़फने को मजबूर रहे। आरोप है कि पार्किंग ठेकेदार की मनमानी के चलते अव्यवस्थित पार्किंग लगवाई गई, जिससे जाम की स्थिति निर्मित हुई। एम्बुलेंस वाहनों के दरवाजे न खुलने से कई रेफर प्रसूताएं और गंभीर मरीजों की हालत नाजुक बनी रही।
बताया जाता है कि शुक्रवार की दोपहर 12 बजे 5 से ज्यादा एम्बुलेंस वाहन अस्पताल के गेट के सामने खड़ी रही लेकिन मरीजों को भर्ती नहीं करा पाई। जिला अस्पताल परिसर के सामने बनी रेलिंग के सामने दो पहिया वाहन अव्यवस्थित खड़े दिखाई दिए जिसके चलते जाम की स्थति बनी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वर्तमान पार्किंग ठेकेदार अखिलेश सिंह एवं राजू सिंह के कर्मी जाम खुलवाने की जगह वाहनों में चैन लगाकर वसूली में उतारू रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों ने बताया कि दो पहिया वाहनों में जबरन चैन लगाकर 300 से 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं।
ठेकेदार का तर्क, मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों की गाड़ी से लगता है जाम
स्टार समाचार ने जब पार्किंग ठेकेदार अखिलेश सिंह से इस मुद्दे पर बात की तो उन्होंने बताया कि बारिश की वजह से शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के कई चिकित्सक चार पहिया वाहन लेकर अस्पताल पहुंचे जिसके चलते अस्पताल के गेट के सामने अव्यवस्थित पार्किंग लग गई। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों से जब वाहन हटाने या अन्य स्थान पर पार्क करने की बात कही गई तो चिकित्सक भड़क उठे। ऐसे में जाम की स्थिति भयंकर हो गई।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं का रास्ता रोकना न सिर्फ अमानवीय है बल्कि यह सीधे-सीधे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ माना जा रहा है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की अव्यवस्था ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल परिसर के चारों ओर अव्यवस्थित पार्किंग ही जाम का कारण बन रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन इस पूरे मामले से अंजान है या जानबूझ कर आंखे बंद किए हुए हैं। क्या वाकई मरीजों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना दिया गया है।
राजू ने नहीं लिया कार्यादेश
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पार्किंग का नया ठेका मेसर्स राजू सिंह के नाम 4 लाख 51 हजार रुपए की निविदा पर दिया गया है जो कि अब तक सबसे बड़ी बोली मानी जा रही है। ठेकेदार द्वारा पार्किंग टेंडर लेने के लिए बड़ी बोली तो लगा दी गई लेकिन अभी तक कार्यादेश नहीं लिया है। कार्य अनुबंध न कराने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा पूर्व ठेकेदार मेसर्स अखिलेश सिंह को ही पार्किंग का जिम्मा सौंपा गया है। हालत यह है कि राजू के ठेके पर अखिलेश की वसूली शुरू है।
आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है, कई शिकायतें रोजाना आ रही हैं, सीईओ के पास प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है जल्द ही पार्किंग ठेकेदार पर एक्शन लिया जाएगा।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन जिला अस्पताल
पोस्टमार्टम कराने के लिए मैहर से आए हैं, पता नहीं किसके द्वारा वाहन में चैन लगा दी गई है, ताला खोलने के नाम पर पैसा मांगा जा रहा है।
रामसुशील (मैहर)
बच्चे को दिखाने मैहर क्षेत्र से आए हैं, जैसे ही बाहर आए देखा तो गाड़ी में चैन लगी थी, ठेकेदार के कर्मियों से पूछा तो उन्होंने कहा कि पैसे जमा करिए तभी चैन खुलेगी।
नरेन्द्र, मैहर


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