सतना जिला अस्पताल के पार्किंग टेंडर पर नया विवाद खड़ा हो गया है। ठेका मिलने के बावजूद पार्किंग स्थल को लेकर ठेकेदार और प्रबंधन आमने-सामने हैं। मामले की जांच के लिए कलेक्टर ने तीन सदस्यीय टीम गठित की है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल का पार्किंग टेंडर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। इस बार विवाद का केंद्र पार्किंग शुल्क नहीं, बल्कि पार्किंग के संचालन के लिए उपयुक्त स्थान को लेकर प्रबंधन और नए ठेकेदार के बीच चल रही रस्साकशी है। एक ओर अस्पताल प्रबंधन नए ठेकेदार पर अनुबंध कर कायार्देश लेने का दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर ठेकेदार का कहना है कि बिना पर्याप्त और स्पष्ट पार्किंग स्थल के वह अनुबंध कैसे स्वीकार करे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार समस्या के निदान के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से चर्चा की गई जिस पर जगह का परीक्षण कर निर्णय लेने तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है।
टेंडर हो सकता है निरस्त
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पार्किंग का नया ठेका निविदा प्रक्रिया के माध्यम से दिया गया है। इस बार मेसर्स राजू सिंह ने 4 लाख 51 हजार रुपये की उच्चतम बोली लगाकर ठेका हासिल किया है, जो अब तक की सबसे बड़ी बोली मानी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि इस बार ठेकेदार ने पार्किंग टेंडर लेने सबसे बड़ी बोली लगा तो दी लेकिन अनुबंध अभी तक नहीं कराया है। ऐसी स्थिति में कलेक्टर द्वारा गठित टीम द्वारा टेंडर निरस्तगी की कार्रवाई भी की जा सकती है या दुसरे पोजीसन वाले निविदाकार को टेंडर सौंपा जा सकता है।
ठेका राजू के नाम, लेकिन चर्चा अखिलेश की भूमिका पर & सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग साढ़े तीन लाख रुपये में पार्किंग ठेका प्राप्त करने वाले मेसर्स अखिलेश सिंह की सहमति से ही इस बार राजू सिंह को निविदा दिलाए जाने की चचार्एं चल रही हैं। निविदा प्रक्रिया में मेसर्स राजू सिंह, मेसर्स चूड़ामणि द्विवेदी और मेसर्स चिंतामणि उर्मलिया ने भाग लिया था, लेकिन सबसे ऊंची बोली राजू सिंह की रही। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि यदि ठेका आवंटित हो चुका है तो अनुबंध और कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी?
कायार्देश नहीं, जारी है पुराना संचालन
जानकारी के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने नए ठेकेदार को कई नोटिस जारी कर अनुबंध निष्पादित करने और कायार्देश लेने के निर्देश दिए हैं। अनुबंध की शर्तों के अनुसार ठेकेदार को लगभग 9 लाख रुपये की राशि रोगी कल्याण समिति के खाते में जमा करनी होगी। लेकिन नए ठेकेदार का तर्क है कि पहले उसे पार्किंग संचालन के लिए निर्धारित और पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाए। इसी विवाद के चलते अब तक अनुबंध नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप, कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक निवर्तमान ठेकेदार मेसर्स अखिलेश सिंह ही पार्किंग संचालन कर रहा है।

सीधी के खैरा गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। घटना में एक ही परिवार के पांच लोग घायल हुए, जबकि मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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चित्रकूट में 36.84 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे कामदगिरी परिक्रमा मार्ग की गुणवत्ता जांच में खामियां मिलीं। कलेक्टर और प्राधिकरण अध्यक्ष ने मौके पर निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया।
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