चित्रकूट के थरपहाड़ गांव में बीमार युवक को अस्पताल पहुंचाने ग्रामीणों को कंधे का सहारा लेना पड़ा। सड़क सुविधा के अभाव ने स्वास्थ्य सेवाओं और विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छुलहा गांव में 900 मीटर मुख्य रास्ता बंद होने और मुरुम नहीं डाले जाने से ग्रामीण दोबारा धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस के बाद सड़क पर काम शुरू कराने का आश्वासन दिया।
सतना के पोड़ी पतौरा-धवारी मार्ग की जर्जर हालत से पचास से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीण परेशान हैं। बरसात में गड्ढों और कीचड़ के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि सड़क निर्माण की मांग वर्षों से अधूरी है।
ग्राम पंचायत खामिनखेड़ा में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन डालने के लिए पीएचई ठेकेदार ने 6 माह पहले सीसी सड़कें तोड़ी थीं। मरम्मत न होने से 730 मीटर सड़क और नालियां दलदल में बदल गई हैं। ग्रामीण दल-दल और कीचड़ से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे छात्र, बुजुर्ग और वाहन चालकों को भारी परेशानी हो रही है। पंचायत ने सीईओ को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
सुंदरा-सेमरिया राज्य मार्ग और आसपास की सड़कों की हालत बदहाल है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी पटरी और जर्जर डामर से लोगों का सफर मुश्किल हो गया है। मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में केवल खानापूर्ति हो रही है। 20 किलोमीटर के इस मार्ग पर अनगिनत गड्ढों से आए दिन हादसे हो रहे हैं।
सतना जिले का गुलुआ गांव आज भी बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित है। बीते 20 वर्षों में सिर्फ एक बार मिट्टी डाली गई। बरसात में रास्ता दलदल बन जाता है जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों और बीमार ग्रामीणों को भारी परेशानी होती है। ग्रामीण नेताओं से निराश हैं।
जयसिंहनगर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बसोहरा, ठेंगरहा और देवरी की सड़कें आज भी बदहाल हैं। बारिश के मौसम में कीचड़ और गड्ढों से आमजन, छात्र-छात्राएं और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई बार शिकायतों और सर्वे के बावजूद अब तक शासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सतना जिले के सितपुरा-छींदा मार्ग की दुर्दशा के विरोध में ग्रामीणों ने सड़क पर ही धान की रोपाई कर अनोखा प्रदर्शन किया। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के क्षेत्र में यह विरोध सरकार की विकास नीतियों पर बड़ा सवाल है। कांग्रेस का समर्थन, छात्रों की सुरक्षा, और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
सतना जिले के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। चित्रकूट और त्यौंधरा जैसे गांवों में झोली में प्रसूता और कंधे पर बुजुर्गों को अस्पताल ले जाने की घटनाएं प्रशासनिक और राजनीतिक उदासीनता की पोल खोल रही हैं। वहीं सितपुरा-छींदा-बचवई मार्ग की बदहाली के विरोध में ग्रामीण सड़क पर धान रोपने का प्रदर्शन कर रहे हैं।
छतरपुर में मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली घटनाएँ: बारिश में शव का अंतिम संस्कार मुश्किल, मरीज को खाट पर उठाकर ले जाने की मजबूरी। जानिए क्यों प्रशासन के दावों पर उठे सवाल और मंत्री की प्रतिक्रिया।






















