सतना जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट में विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और संसाधनों की कमी स्वीकार की गई। 150 प्रतिशत बेड ऑक्यूपेंसी के कारण मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
चार सौ बिस्तरीय जिला अस्पताल में सीमित संसाधनों में गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराना चुनौती भरा है। कई संसाधनों एवं विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख कराना पड़ रहा है। जिला अस्पताल पर मरीजों का भरी दवाब है। इन सब बातों का खुलासा आधिकारिक जांच रिपोर्ट में हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में कई अहम तथ्य स्वीकार किए हैं। सूत्रों से मिल जानकारी के अनुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को भेजे गए जवाब में जिला अस्पताल प्रबंधन ने बताया है कि जिला अस्पताल में मरीजों के निजी अस्पतालों की ओर जाने की प्रमुख वजह विशेषज्ञ डॉक्टरों और मानव संसाधन की कमी, 150 प्रतिशत तक पहुंच चुकी बेड आॅक्यूपेंसी तथा बेहतर सुविधाओं की तलाश है।
स्टाफ की कमी बनी बाधा
बताया गया कि जिला अस्पताल में 30 आईसीयू बेड हैं। इनमें 13 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, जिनमें से 10 चालू हालत में हैं, जबकि तीन वेंटिलेटर रिपेयरिंग में हैं। वर्तमान में अस्पताल में 20 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती हैं और उनके उपचार की समुचित व्यवस्था होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 42 स्वीकृत पद हैं, लेकिन केवल 21 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। चिकित्सा अधिकारियों के 27 में से 17 पद भरे हैं, जबकि नर्सिंग स्टाफ के 203 स्वीकृत पदों के मुकाबले 160 कर्मचारी कार्यरत हैं। यानी तीनों श्रेणियों में स्टाफ की कमी बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिला अस्पताल में 24 घंटे सातों दिन आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं।
रिपोर्ट में मानी गईं मरीजों के पलायन की वजहें
जांच दल ने मरीजों के निजी अस्पतालों में जाने के पीछे पांच प्रमुख कारण बताए हैं, जिनमें विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, जिससे सर्जरी के दिनों की संख्या प्रभावित होती है, अस्पताल की बेड आॅक्यूपेंसी लगभग 150 प्रतिशत होने से सभी मरीजों को तत्काल बेड उपलब्ध नहीं हो पाते, बेहतर सामान्य सुविधाओं की अपेक्षा, अस्पताल पर मरीजों का अत्यधिक दबाव, मानव संसाधनों की कमी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग की इस रिपोर्ट से साफ है कि जिला अस्पताल में संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी अब विभागीय स्तर पर भी स्वीकार की गई है। हालांकि विभाग का दावा है कि उपलब्ध संसाधनों के बीच गंभीर मरीजों के उपचार की समुचित व्यवस्था की जा रही है।

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