भारत के प्राइवेट अस्पतालों में अब सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए बच्चों का जन्म होना सामान्य बात हो गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के नए आंकड़ों के अनुसार, देश के निजी अस्पतालों में होने वाली डिलीवरी में से 54 फीसदी केस सिजेरियन के पाए गए हैं। इस मामले में कुछ राज्य बहुत आगे हैं।

देश में पैदा होने वाले चार में से एक बच्चे का सिजेरियन के जरिए जन्म
देश के निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन से 54 फीसदी बच्चों का जन्म
राज्यों के सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन की बेहद कम सुविधा उपलब्ध
जम्मू-कश्मीर में 90 और तेलंगाना में 84 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी
गरीब महिलाओं को आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही

भोपाल/नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
भारत के प्राइवेट अस्पतालों में अब सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए बच्चों का जन्म होना सामान्य बात हो गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के नए आंकड़ों के अनुसार, देश के निजी अस्पतालों में होने वाली डिलीवरी में से 54 फीसदी केस सिजेरियन के पाए गए हैं। इस मामले में कुछ राज्य बहुत आगे हैं। पश्चिम बंगाल के निजी अस्पतालों में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां 87.7 फीसदी बच्चों का जन्म ऑपरेशन से हुआ है। वहीं, तेलंगाना में 84 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 66 फीसदी डिलीवरी सिजेरियन दर्ज की गई हैं। जहां देश का एक बड़ा हिस्सा जरूरत से ज्यादा सिजेरियन ऑपरेशन की समस्या से जूझ रहा है। वहीं बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कहानी बिल्कुल उल्टी है। बिहार में कुल सिजेरियन डिलीवरी सिर्फ 13 फीसदी हैं, जबकि झारखंड और मध्य प्रदेश में 16 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण यह है कि इन राज्यों के सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन की बेहद कम सुविधा उपलब्ध है।
| राज्य | शहर % | ग्रामीण % | कुल % |
|---|---|---|---|
| जम्मू-कश्मीर | 92.5 | 88.5 | 90 |
| पश्चिम बंगाल | 86.8 | 88.1 | 87.7 |
| तेलंगाना | - | 84.5 | 83.9 |
| असम | - | - | 81.4 |
| त्रिपुरा | 93 | - | - |
| राजस्थान | 49.4 | 29.1 | 35 |
| मिजोरम | - | - | 35.2 |
| नगालैंड | - | - | 32.5 |
| भारत (औसत) | 57.4 | 52.2 | 54.1 |
राजस्थान की स्थिति भी गंभीर
बिहार के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ 2.7 फीसदी सिजेरियन होते हैं। झारखंड में 6.1 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 10 फीसदी से कुछ ज्यादा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई अच्छी बात नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि इन राज्यों में गरीब महिलाओं को आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसकी वजह से वहां मातृ मृत्यु दर भी ज्यादा है। राजस्थान की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है।
18 राज्यों के अस्पतालों की स्थिति गंभीर
देश के 27 राज्यों और दो बड़े केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में से 18 राज्यों में स्थिति यह है कि प्राइवेट अस्पतालों में होने वाले आधे से अधिक जन्म सिजेरियन के जरिए ही हो रहे हैं। अगर सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों को मिला दिया जाए, तो भी कुछ राज्यों में कुल सिजेरियन का आंकड़ा बहुत ज्यादा है।
जम्मू में आधी डिलीवरी सिजेरियन
तेलंगाना में कुल डिलीवरी का 62 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सिजेरियन है, जबकि आंध्र प्रदेश में यह 52 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 44.5 फीसदी है। जम्मू-कश्मीर की कहानी और भी अलग है, जहां निजी अस्पतालों में सिजेरियन का रेट 90 फीसदी है और सरकारी अस्पतालों में भी यह लगभग 49 प्रतिशत है। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर में होने वाली डिलीवरी में से आधी से ज्यादा सिजेरियन होती हैं।
सालों-साल लगातार बढ़ रहा आंकड़ा
देश में पिछले दो दशकों में सिजेरियन जन्मों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 2004-05 में देश में सिर्फ 8.5 फीसदी सिजेरियन डिलीवरी होती थीं, जो 2015-16 में बढ़कर 17.2 प्रतिशत हो गईं और फिर 2019-21 में यह आंकड़ा 21.5 फीसदी तक पहुंच गया। अब देश में पैदा होने वाले चार में से एक से अधिक बच्चे (27.2 फीसदी) सिजेरियन के जरिए दुनिया में आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में यह बढ़ोतरी काफी धीमी रही है। 2005-06 में सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन रेट 15.2 फीसदी था, जो अब 16.9 प्रतिशत हो गया है।
दो राज्यों में सिजेरियन की संख्या कम
वहीं दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के सरकारी अस्पतालों में भी 34 से 48 फीसदी तक सिजेरियन डिलीवरी हो रही हैं। असम और ओडिशा के निजी अस्पतालों में भले ही सिजेरियन का आंकड़ा बहुत ऊंचा क्रमश: 81.4 और 76.8 फीसदी है, लेकिन इन राज्यों में सिजेरियन की संख्या काफी कम है। असम के सरकारी अस्पतालों में यह रेट 18% और ओडिशा में 22% है।


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