मध्य प्रदेश में 1 मई से देश की पहली डिजिटल जनगणना का हाउस लिस्टिंग फेज शुरू हो रहा है। मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर 33 तरह की जानकारियां जुटाई जाएंगी। जानें पूरी प्रक्रिया

भोपाल। स्टार समाचार वेब
भारत की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना के लिए मध्य प्रदेश में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। प्रदेश में आगामी 1 मई 2026 से इस महाअभियान के पहले चरण का शंखनाद होने जा रहा है। एक महीने तक चलने वाले इस पहले फेज में मुख्य रूप से मकानों के सूचीकरण (House Listing) पर जोर दिया जाएगा। इस दौरान सरकारी कर्मचारी घर-घर पहुंचकर न केवल मकानों की नंबरिंग करेंगे, बल्कि परिवारों के रहन-सहन से जुड़ी बुनियादी जानकारियों का डेटा भी एकत्र करेंगे।
जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता के मुताबिक, जनगणना की इस विशाल प्रक्रिया को सुव्यवस्थित ढंग से दो चरणों में बांटा गया है। प्रथम चरण, जो मई 2026 में शुरू हो रहा है, पूरी तरह से मकानों की स्थिति और परिवारों के सूचीकरण के लिए समर्पित रहेगा। इसके सफल समापन के बाद, अगले वर्ष दूसरे चरण की शुरुआत की जाएगी, जिसमें प्रदेश की जनसंख्या की वास्तविक और विस्तृत गणना का कार्य किया जाएगा।
इस बार की जनगणना काफी विस्तृत होने वाली है क्योंकि प्रगणक (Enumerators) परिवार के मुखिया से कुल 33 अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी हासिल करेंगे। इसमें मकान की भौतिक स्थिति जैसे दीवार और छत की बनावट से लेकर परिवार में उपलब्ध सुविधाओं तक का ब्योरा शामिल होगा। विशेष रूप से स्वच्छ पेयजल के स्रोत, शौचालय की सुविधा, बिजली और पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता जैसे डेटा जुटाए जाएंगे। साथ ही, डिजिटल युग को देखते हुए इंटरनेट, स्मार्टफोन, टेलीविजन और वाहनों (साइकिल से लेकर कार तक) के मालिकाना हक की जानकारी भी रिकॉर्ड की जाएगी।
जनगणना 2027 के इतिहास में पहली बार कागजी कार्रवाई की जगह पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए 'HLO ऐप' विकसित किया गया है, जिसके जरिए डेटा का रियल-टाइम संकलन होगा। इस बार नागरिकों के लिए 'सेल्फ एन्युमरेशन' (स्व-गणना) की सुविधा भी दी गई है, जिससे वे स्वयं आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना विवरण दर्ज कर सकेंगे। पूरे अभियान की पारदर्शिता और निगरानी के लिए 'CMMS वेब पोर्टल' का सहारा लिया जा रहा है।
राजधानी भोपाल में जनगणना के सुचारू संचालन के लिए जिले को 25 जोनों में विभाजित किया गया है। यहाँ 6,000 से अधिक कर्मचारियों की फौज तैनात की गई है, जिसमें शहरी क्षेत्र के लिए 5042 और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 907 प्रगणक अपनी सेवाएं देंगे। एक प्रगणक को औसतन 200 घरों की गणना की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी सहायता और कार्यों की जांच के लिए प्रत्येक 6 प्रगणकों पर एक पर्यवेक्षक (Supervisor) की नियुक्ति की गई है। 15 से 25 अप्रैल तक चलने वाले प्रशिक्षण सत्रों में कर्मचारियों को मकान नंबरिंग की बारीकियों और आम जनता से बेहतर समन्वय के गुर सिखाए जा रहे हैं।

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