सतना-मैहर में संविदा पीजीएमओ और चिकित्सा अधिकारियों के दस्तावेजों के तीन दिवसीय सत्यापन आदेश पर विरोध शुरू हो गया है। चिकित्सकों ने नियमित और संविदा दोनों के दस्तावेजों की समान व पारदर्शी जांच की मांग उठाई है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के अलग-अलग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ संविदा पीजीएमओ एवं एमओ के दस्तावेजों का सत्यापन होगा। दस्तावेजों के सत्यापन का यह काम तीन दिनों में पूर्ण किया जाना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) अन्तर्गत संविदा पीजीएमओ एवं चिकित्सा अधिकारियों के दस्तावेजों के सत्यापन के निर्देश के बाद संविदा चिकित्सकों ने नाराजगी जताई है, संविदा चिकित्सको का सवाल है कि जब नियमित और हमारा दोनों चिकित्सको का काम एक है तो फिर जांच सिर्फ हमारे दस्तावेजों का ही क्यों? संविदा चिकित्सक इस बात से हैरान हैं कि हर बार उनकी ही शैक्षणिक डिग्री एवं अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है जबकि नियमित चिकित्सक जो कि विदेशों की डिग्री लिए हुए बैठे हैं उन पर कोई जांच -आपत्ति नहीं होती है। बताया जाता है कि सीएमएचओ डॉ.मनोज शुक्ला द्वारा सतना- मैहर जिले में कार्यरत सभी संविदा स्नातकोत्तर चिकित्सा अधिकारी (पीजीएमओ) एवं चिकित्सा अधिकारियों के नियुक्ति पश्चात कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के समय पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के आॅनलाइन एवं भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर संविदा चिकित्सा अधिकारियों में रोष देखने को मिल रहा है।
जिले के अंदर कई ऐसे नियमित चिकित्सक हैं जो रशिया, यूक्रेन जैसे विदेशों से डॉक्टरी की डिग्री हासिल किए हुए हैं उनके दस्तावेजों का सत्यापन आज तक नहीं किया गया। बड़े पदों में बैठकर उनके द्वारा मलाई मारी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि रामपुर बाघेलान के ब्लॉक मेडिकल आॅफीसर राघवेन्द्र सिंह गुर्जर के एवं कोटर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मेडिकल आॅफीसर सर्वेश सिंह के पास आउट आॅफ कंट्री की डिग्रियां हैं जिन पर ये नियमित नौकरी कर रहे हैं।
तीन दिनों के अंदर करनी है जांच
एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक के निर्देश पर सीएमएचओ द्वारा सतना-मैहर जिले के सिविल सर्जन, समस्त प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, ब्लाकों के खंड चिकित्सा अधिकारी एवं शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आपके अधिनस्थ कार्यरत संविदा चिकित्सा अधिकारियों के दस्तावेजों के सत्यापन कराने के लिए तीन दिन का शेड्यूल जारी किया गया है। चिकित्सकों को मूल दस्तावेजों एवं एक प्रति स्वयं प्रमाणित दस्तावेज की छायाप्रति डीएचओ टू डॉ. नलिनी शुक्ला के समक्ष पेश करने के लिए कहा गया है।
पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए : संविदा चिकित्सक
इधर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के इस आदेश पर संविदा चिकित्सकों ने कहा कि यह एक अत्यन्त चिंताजनक विषय है एनएचएम अन्तर्गत वर्षो से सेवाएं दे रहे कई संविदा मेडिकल आफीसरों के दस्तावेजों का सत्यापन बार-बार किया जा रहा है जबकि नियमित चिकित्सकों का सत्यापन नहीं होता। कार्य एक है तो पारदर्शिता बरतते हुए जांच भी दोनों की होनी चाहिए। बताया गया कि एमबीबीएस करने के बाद भी नियमित नौकरी नहीं मिलने पर मजबूरन चिकित्सकों को संविदा की नौकरी करनी पड़ती है। आज शासन द्वारा पीएससी से रेगुलेर भर्ती निकाली जा रही है जिसमें परीक्षा पास कर कई नियमित नौकरी पा रहे हैं। एनएचएम अन्तर्गत रेगुलर का कोई नियम नहीं है, दस साल नौकरी करने के बाद भी चिकित्सक संविदा में ही रहता है जबकि एनएचएम अन्तर्गत कई आईएएस प्रशासनिक अधिकारी बैठकर इस प्रकार के आदेश जारी कर रहे हैं।


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