सतना जिला अस्पताल से कंगारू मदर प्रोजेक्ट शुरू होगा। दिल्ली-भोपाल की विशेषज्ञ टीम ने मातृ-शिशु सेवाओं, प्रसव कक्ष और एसएनसीयू का निरीक्षण किया। रिकॉर्ड के आधार पर भी व्यवस्थाओं और सेवाओं की गुणवत्ता परखी जाएगी।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सतना जिला अस्पताल एक नई पहल का केंद्र बनने जा रहा है। जिले में कंगारू मदर कार्यक्रम की शुरूआत जिला अस्पताल से की जाएगी जिसे अंश प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है। इसके तहत माताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका सञ्चालन एनजीओ द्वारा किया जाएगा। बुधवार को इसी सिलसिले में दिल्ली और भोपाल से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने अस्पताल की मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। बताया गया कि जिन अस्पतालों में पोस्ट नैटल वार्ड अथवा नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए विशेष इकाई उपलब्ध है, वहां इस प्रोजेक्ट को लागू किया जाएगा। राजस्थान के 15 जिलों में यह परियोजना पहले ही शुरू की जा चुकी है। अब मध्यप्रदेश में इसकी शुरूआत सतना जिला अस्पताल से किए जाने की तैयारी है। दिल्ली और भोपाल से आई टीम के निरीक्षण को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एसएनसीयू में भर्ती नवजातों का लिया जायजा
टीम ने जिला अस्पताल की मेटरनिटी विंग का निरीक्षण करते हुए प्रसव कक्ष की व्यवस्थाओं को देखा। इसके साथ ही स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती नवजातों के उपचार और देखभाल की व्यवस्था का भी परीक्षण किया गया। टीम ने यह समझने का प्रयास किया कि अस्पताल में मां और नवजात के बीच बेहतर संपर्क तथा नवजात की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को किस तरह प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। टीम में राज्य स्तर से डॉ. आरती पाराशर के साथ अन्य सदस्य मौजूद थी वहीं सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला ने जिला कार्यक्रम प्रबंधक राकेश कर्ष एवं डॉ. ज्ञानेश मिश्रा (डीसीएम) को संयुक्त रूप से भ्रमण की जिम्मेदारी सौंपी। जिला चिकित्सालय की ओर से डॉ. विजेता राजपूत ने टीम का नेतृत्व किया।
क्या है यह पद्धति
कंगारू मदर केयर ऐसी पद्धति है, जिसमें नवजात शिशु को विशेष रूप से मां के सीने से त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया जाता है। इससे बच्चे को गर्माहट मिलने के साथ स्तनपान को बढ़ावा मिलता है और मां-बच्चे के भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूती मिलती है। खासतौर पर कम वजन या समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए यह पद्धति उपयोगी मानी जाती है।
रिकॉर्ड से भी होगी पड़ताल
टीम द्वारा केवल मौके की व्यवस्थाओं का निरीक्षण ही नहीं किया जा रहा, बल्कि अब रिकॉर्ड के आधार पर भी सेवाओं का विश्लेषण किया जाएगा। टीम गुरुवार को पुन: जिला चिकित्सालय का विजिट कर अभिलेखों से आवश्यक जानकारी जुटाएगी, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का विस्तृत आकलन किया जा सके। निरीक्षण का उद्देश्य कमियों की पहचान कर सेवाओं को और बेहतर बनाना तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना बताया गया है।

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