सतना और मैहर की कई गौशालाओं में तेज आंधी से टीन शेड उड़ गए और ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। पंचायतों ने मरम्मत बजट और स्थायी रखरखाव व्यवस्था नहीं होने पर शासन की योजना और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना के तहत बनाए गए गौशालाओं के ढांचे तेज आंधी और हवाओं के सामने टिक नहीं सके। सतना और मैहर जिले में संचालित कई गौशालाओं की टीन शेड उड़ गईं, लोहे के ढांचे मुड़ गए और कुछ जगह छतों के हिस्से टूटकर नीचे गिर गए। इस घटना ने न केवल निर्माण की गुणवत्ता बल्कि योजना के रखरखाव मॉडल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई है कि इन गौशालाओं की मरम्मत और रखरखाव के लिए शासन स्तर पर कोई स्थायी नियम या अलग बजट व्यवस्था ही तय नहीं की गई।
8 साल पहले बनी थी गौशालाएं
दोनों जिलों को मिलाकर वर्तमान में 44 गौशालाएं संचालित हैं। इनका निर्माण वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना के तहत कराया गया था। उस समय सरकार का उद्देश्य था कि गांवों और सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गौवंश को सुरक्षित स्थान मिल सके और किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। इसके लिए पंचायत स्तर पर बड़े पैमाने पर गौशालाएं बनाई गईं। शुरूआत में यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में काफी चर्चित रही लेकिन समय बीतने के साथ इन ढांचों का रखरखाव सबसे बड़ी चुनौती बन गया।
जर्जर हो गए टीन शेड
ग्राम पंचायतों के मुताबिक अधिकांश गौशालाओं में लगे टीन शेड अब पुराने हो चुके हैं। कई जगह टीन की चादरों में जंग लग चुकी थी, एंगल कमजोर पड़ चुके थे और सपोर्ट पाइप ढीले हो गए थे। बीते कुछ वर्षों में पंचायतों ने अपने सीमित संसाधनों से छोटे-मोटे सुधार जरूर कराए लेकिन बड़े स्तर की मरम्मत संभव नहीं हो सकी। हाल ही में चली तेज हवाओं ने इन कमजोरियों को उजागर कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में कई गौशालाओं की छतें हवा के साथ उड़ गईं, जिससे अंदर रखा गौवंश खुले में आ गया।
मेंटीनेस का कोई मॉडल नहीं
गौशालाओं के निर्माण के समय करोड़ों रुपए खर्च किए गए लेकिन उनके रखरखाव का कोई दीर्घकालिक मॉडल तैयार नहीं किया गया। पंचायतों को केवल संचालन और चारे-पानी की जिम्मेदारी सौंप दी गई। समय के साथ जब ढांचे पुराने होने लगे तो मरम्मत का सवाल सामने आया, लेकिन इसके लिए न अलग बजट मिला और न कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश। पंचायतों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा में नुकसान होने पर भी कोई विशेष सहायता प्रावधान नहीं है। कई पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि वे वर्षों से गौशालाओं की मरम्मत के लिए अतिरिक्त राशि की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार सीमित संसाधनों का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है। परिणाम यह हुआ कि अब अधिकांश गौशालाएं धीरे-धीरे जर्जर स्थिति में पहुंच गई हैं।
गौवंश खुले में, पंचायतों ने तिरपाल से ढका
आंधी के बाद कई पंचायतों में तत्काल संकट की स्थिति बन गई। छत उड़ने के बाद मवेशियों को बारिश और धूप से बचाने के लिए पंचायतों ने अस्थायी इंतजाम शुरू किए। कहीं तिरपाल बांधे गए तो कहीं टूटे शेड के नीचे लकड़ी और बांस का सहारा देकर ढांचा खड़ा किया गया। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है। यदि समय रहते स्थायी मरम्मत नहीं हुई तो बरसात में स्थिति और खराब हो सकती है।
बरसात से पहले बढ़ी चिंता
तेज हवा के बाद अब पंचायतों की सबसे बड़ी चिंता आगामी मानसून को लेकर है। जिन गौशालाओं की छतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। वहां बारिश के दौरान पानी भरने और चारा खराब होने का खतरा बढ़ गया है। पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई तो गौवंश को खुले में रखना पड़ेगा, जिससे पूरी योजना का उद्देश्य प्रभावित होगा।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने भी योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च कर ढांचे तो बना दिए गए, लेकिन उनकी उम्र और रखरखाव को लेकर कोई दीर्घकालिक योजना नहीं बनाई गई। अब हर आंधी और बारिश के बाद पंचायतों को अस्थायी उपायों के भरोसे रहना पड़ रहा है।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 2-3 अक्टूबर को भोपाल दौरे पर रहेंगे। वे भेल मैदान में गोपालक सम्मेलन, नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी और IISER परिसर का शिलान्यास करेंगे।
मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने भोपाल में कोर कमेटी और पदाधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने नेताओं के स्वागत में जेसीबी से फूल बरसाने पर रोक लगाने और 3 महीने के भीतर गुटबाजी खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश में शिक्षकों का आंदोलन हुआ उग्र। टीईटी अनिवार्यता, ई-अटेंडेंस और वरिष्ठता जैसी 3 सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल के नीलम पार्क में प्रदर्शन। 2 अक्टूबर को प्रदेशभर में होगा उपवास और सत्याग्रह।
उज्जैन शाही मस्जिद विवाद पर जमीयत उलमा मप्र के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कोर्ट में तथ्य छिपाने, सड़क चौड़ीकरण के लिए तीन फीट जमीन के वैकल्पिक उपायों और गिरफ्तारियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास कार्यों, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 और 'सेवा संकल्प अभियान' की जानकारी दी।
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले में आयोग की रिपोर्ट सामने आ गई है। लापरवाही और देरी के कारण 36 से अधिक लोगों की मौत के लिए 8 अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है, जबकि जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट मिल गई है।
मध्य प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त निर्देश दिए हैं। स्कूल-कॉलेजों के आसपास निगरानी, हॉट स्पॉट की पहचान और हेल्पलाइन नंबर जैसी अहम जानकारियों के साथ पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के जगला गांव का दौरा किया। उन्होंने कुपोषण और मलेरिया से जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं। चुनाव में अभी दो वर्ष से अधिक का समय बाकी है, लेकिन कांग्रेस अभी से तैयारी में जुट गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक पखवाड़े के भीतर दूसरी बार मध्य प्रदेश आ रहे हैं। वह आज बालाघाट के बैहर विकासखंड के जागला गांव में कुपोषण, मलेरिया और खसरा से प्रभावित बैगा आदिवासी बच्चों के परिजनों से मुलाकात करेंगे।
विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सत्र का गुरुवार को उत्साहपूर्ण आगाज हुआ। पर्यटन सत्र के पहले दिन ताला, मगधी और खितौली गेट को आकर्षक ढंग से सजाया गया। पार्क प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यटकों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया।