एफसीआई में चावल जमा कराने के दौरान स्टैकिंग शुल्क के नाम पर मिलरों से वसूली, दोहरे भुगतान और ढाई करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता के आरोपों ने पारदर्शिता तथा जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले में सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला को आरोप पत्र जारी किया गया है। विभाग ने ब्लड सेंटर संचालन में गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
रीवा में प्रवर्तन निदेशालय ने चार प्रमुख संविदाकारों के घर और कार्यालयों पर छापेमार कार्रवाई की। वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर भुगतान और कथित घोटालों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
डिप्टी डायरेक्टर हेल्थ वैभव जैन ने सतना जिले की स्वास्थ्य संस्थाओं का निरीक्षण किया। दवा स्टोरों में अव्यवस्था, अनुपयोगी दवाओं का भंडारण और चिकित्सकों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए सुधार के निर्देश दिए।
रीवा में डीईओ पर गंभीर अनियमितताओं के बावजूद निलंबन टल गया। कलेक्टर के प्रस्ताव पर कमिश्नर ने कार्रवाई बदलते हुए अतिरिक्त आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए, जिससे मामले पर सवाल उठे।
सतना कृषि उपज मंडी में महिला हम्मालों की बढ़ती संख्या और बिना लाइसेंस काम पर सवाल उठे हैं। नियमों के उल्लंघन और लाइसेंस नवीनीकरण में अनियमितता को लेकर पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मैहर में वित्तीय अनियमितता पर प्राचार्यों के निलंबन की कार्रवाई तेज, जबकि रीवा में 28 लाख के घोटाले पर अब तक कोई ठोस एक्शन नहीं।
जबलपुर के माता गुजरी महिला महाविद्यालय में छात्रवृत्ति में बड़ी धांधली। छात्रा की स्कॉलरशिप राशि दूसरे के खाते में भेजी गई। NSUI ने उठाए सवाल, प्रबंधन ने दिए जांच के आदेश।
अमदरा के ग्राम खेरवाकला मोड़ पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं। एसडीओ और पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट ने अनियमितताओं की पुष्टि की है। विधायक, अधिवक्ता और स्थानीय लोगों ने जांच, निर्माण रोकने और पुनः सही डिजाइन से कार्य कराने की मांग उठाई है।
सतना जिले में कुपोषण का संकट फिर उजागर हुआ है। नागौद क्षेत्र के पनास आंगनवाड़ी केंद्र में स्वास्थ्य जांच के दौरान 7 बच्चे अति गंभीर कुपोषित पाए गए। चार माह पहले मझगवां क्षेत्र में मासूम रजा हुसैन की मौत के बाद भी जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से लेकर स्वास्थ्य अमले तक की लापरवाही जारी है। आंकड़े बताते हैं कि सतना के 125 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में कुपोषण का स्तर सरकारी मानकों से कई गुना अधिक है। योजनाओं और बजट के बावजूद नतीजे नहीं दिख रहे, जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौन हैं।






















