मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि! एम्स भोपाल में जल्द शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर। अब बिना चीर-फाड़ के हाई-रिजॉल्यूशन स्कैनिंग से होगा पोस्टमॉर्टम। जानें कैसे काम करती है यह तकनीक।
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह के निर्देश पर इंदौर में हेलमेट पहनने को लेकर सख्ती, ड्यूटी पर बिना हेलमेट आए पुलिसकर्मियों का भी कटा चालान, सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बाद लिया गया एक्शन।
मध्यप्रदेश सरकार जहां एक ओर धार्मिक स्थानों को पर्यटन के रूप में विकासित करने की कवायद में जुटी है। वहीं दूसरी ओर निजी कंपनियां लोगों की आस्था पर प्रहार करने से भी नहीं चूक रही हैं। इससे संत समाज के साथ ही साथ जनता में भी आक्रोश पनप रहा है।
रीवा कलेक्ट्रेट की 3000 स्क्वेयर फीट ज़मीन इंडियन काफी हाउस को मात्र ₹500 के स्टांप पर लीज पर दे दी गई, वो भी बिना खसरा नंबर दर्ज किए। अनुबंध में नियमों की भारी अनदेखी की गई है। प्रशासनिक अफसरों की हड़बड़ी और मनमानी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सतना जिले में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बिना एनओसी के विद्युत विभाग द्वारा पोल गाड़े जा रहे हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सौ से ज्यादा पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में नाराजगी है। पत्राचार तक सीमित पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल।
सतना बस स्टैंड स्थित सोनी मिष्ठान भंडार में ग्राहक की शिकायत पर खाद्य विभाग की कार्रवाई। बिना वैध लाइसेंस पर समोसे बेचने पर दुकान सील, गंदगी मिलने पर समोसा और बेसन के नमूने लिए गए। पुलिस की मौजूदगी में हुई जांच, खाद्य विभाग ने अन्य दुकानों से भी मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के नमूने लिए।
सिंगरौली जिले के नौढ़िया ग्राम पंचायत में खेत के बीचों-बीच 6 लाख की लागत से बना पुल अब सवालों के घेरे में है। बिना सड़क या पहुँच मार्ग के बने इस पुल को देखकर ग्रामीण हैरान हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से केवल पैसे की बंदरबांट के लिए यह पुल बनाया गया है। प्रशासन से जवाबदेही की मांग की जा रही है।
गंगेव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बिना डिग्री और चिकित्सा योग्यता के ये लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे गंभीर बीमारियों में भी जान का खतरा बढ़ गया है। क्लीनिक, मेडिकल दुकानों की मिलीभगत और कमीशन के लालच में मरीजों को मंहगी व अनावश्यक दवाएं दी जा रही हैं। आश्चर्य की बात है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।
बिना जमीन डायवर्सन के चल रहे मोबाइल टावरों से सरकार को हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। सिर्फ सतना में 282 टावर कार्यरत हैं, लेकिन एक भी डायवर्सन नहीं कराया गया। राज्यभर में 32,000 से ज्यादा टावर बिना डायवर्सन संचालित हो सकते हैं। राजस्व और प्रशासनिक लापरवाही से उजागर हो रही एक बड़ी चूक।
सतना जंक्शन को पहली बार महिला टिकट कलेक्टर मिली है, लेकिन स्टेशन पर अब भी टिकट चेकिंग स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। सिर्फ 12 टीसी पदस्थ हैं जबकि 24 पद स्वीकृत हैं। नतीजतन स्टेशन पर बेटिकट यात्री और अव्यवस्था का बोलबाला है, जिससे रेलवे को हर महीने लाखों का नुकसान हो रहा है।






















