मप्र हाईकोर्ट ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय की पूर्व महिला रजिस्ट्रार को कथित अवैध कस्टडी में लेने पर चित्रकूट पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने एसडीओपी और महिला सब इंस्पेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मप्र हाईकोर्ट जबलपुर की खंडपीठ ने महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय की पूर्व महिला रजिस्ट्रार को कथित रूप से अवैध तरीके से कस्टडी में लेने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा है कि जब गिरप्तारी का कोई आदेश ही नहीं था तो पुलिस ने ‘गुंडागर्दी’ क्यों की? जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने पूर्व रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए हैें। इसके साथ ही चित्रकूट के एसडीओपी राजेश सिंह बंजारे और महिला सब इंस्पेक्टर नेहा ठाकुर को गुरूवार सुबह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
जारी हुआ था जमानतीय वारंट
यह मामला महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट की रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रमिला सिंह के द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने 27 अपै्रल 2026 को रजिस्ट्रार की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 25 हजार रुपए का जमानतीय वारंट जारी किया था। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार पुलिस को केवल वारंट तामील कर जमानत की प्रक्रिया पूरी करनी थी। आदेश में कहीं भी गिरफ्तारी या बल प्रयोग का उल्लेख नहीं था। बावजूद इसके पुलिस महिला रजिस्ट्रार को अपराधियों की तरह कस्टडी में लेकर कोर्ट पहुंची।
सब इंस्पेक्टर ने मानी कस्टडी की बात
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मौजूद चित्रकूट थाना में पदस्थ सब इंस्पेक्टर नेहा ठाकुर ने स्वीकार किया कि उन्होंने एसडीओपी राजेश सिंह बंजारे के निर्देश पर नीरजा नामदेव को कस्टडी में लिया था। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आदेश की गलत व्याख्या कर पुलिस ने अपनी शक्तियों को दुरुपयोग किया है।
कोर्ट ने लगाई फटकार
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश पत्र में गिरफ्तारी या बल प्रयोग जैसा कोई निर्देश नहीं था। इसके बावजूद महिला अधिकारी को हिरासत में लेना गंभीर मामला है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं। एसडीओपी राजेश सिंह बंजारे और महिला सब इंस्पेक्टर नेहा ठाकुर को गुरूवार की सुबह 10.30 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। एसडीओपी और सब इंस्पेक्टर की व्यक्तिगत उपस्थिति के दौरान आए तथ्यों के आधार पर कोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।
घसीटते हुए ले जाएंगे कोर्ट
ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट की तरफ से पेश अधिवक्ता परितोष गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि अवमानना याचिका का पहले ही निराकरण हो चुका था। इसकी जानकारी चित्रकूट थाना पुलिस को दे दी गई थी। बावजूद इसके पुलिस अधिकारियों ने रजिस्ट्रार को रिहा नहीं किया। अधिवक्ता श्री गुप्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव को धमकी दी कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें घसीटते हुए कोर्ट ले जाया जाएगा।


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